नई दिल्ली, 14 अगस्त 2025 – देश के प्रमुख निजी बैंक ICICI Bank ने अपने सेविंग्स अकाउंट धारकों के लिए न्यूनतम औसत मासिक बैलेंस (AMB) की शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। बैंक ने मेट्रो और अर्बन क्षेत्रों के लिए न्यूनतम बैलेंस को ₹50000 से घटाकर ₹15000 कर दिया है। यह फैसला ग्राहकों की नाराज़गी और मार्केट प्रतिस्पर्धा को देखते हुए लिया गया है।
क्या है नया नियम?
ICICI बैंक ने बुधवार को घोषणा की कि अब:
- मेट्रो और अर्बन लोकेशन – न्यूनतम बैलेंस ₹15,000
- सेमी-अर्बन क्षेत्र – ₹10,000
- ग्रामीण क्षेत्र – ₹2,000 से ₹5,000
बैंक के अनुसार, यह बदलाव 14 अगस्त 2025 से प्रभावी हो गया है।
ग्राहकों की नाराज़गी बनी वजह
जनवरी 2025 में बैंक ने मेट्रो और अर्बन क्षेत्रों के लिए न्यूनतम बैलेंस ₹50,000 कर दिया था, जिसके बाद ग्राहकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
- सोशल मीडिया पर बैंक की आलोचना
- खाता बंद कराने के मामलों में बढ़ोतरी
- वरिष्ठ नागरिकों और छात्रों की परेशानी
इन परिस्थितियों में बैंक ने नियमों पर पुनर्विचार किया और बैलेंस सीमा में कमी की घोषणा की।
मार्केट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर
बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, यह कदम प्रतिस्पर्धी दबाव का नतीजा भी है।
- SBI, HDFC और Axis Bank में मेट्रो शहरों के लिए न्यूनतम बैलेंस ₹5,000–₹10,000 है।
- डिजिटल बैंकों में तो कई खातों पर शून्य न्यूनतम बैलेंस की सुविधा है।
ICICI बैंक इस बदलाव से अपने ग्राहक आधार को बढ़ाने और मौजूदा ग्राहकों को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
पेनल्टी से जुड़ी जानकारी
अगर ग्राहक तय न्यूनतम बैलेंस नहीं रखते हैं तो बैंक Non-Maintenance Charges (NMC) वसूल करेगा।
- मेट्रो/अर्बन – ₹500 से ₹750
- सेमी-अर्बन – ₹300 से ₹500
- ग्रामीण – ₹200 से ₹300
ICICI Bank का बयान
ICICI बैंक के एक प्रवक्ता ने कहा –
“हम अपने ग्राहकों की जरूरतों और प्रतिक्रियाओं को गंभीरता से लेते हैं। इस बदलाव का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं को और अधिक सुलभ बनाना है, खासकर मेट्रो और अर्बन क्षेत्रों में रहने वाले ग्राहकों के लिए।”
विशेषज्ञों की राय
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बैंक के लिए ब्रांड इमेज सुधारने और ग्राहक संतुष्टि बढ़ाने में मदद करेगा। हालांकि, बैंक को अपनी जमा राशि और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अन्य राजस्व स्रोतों पर भी ध्यान देना होगा।
ICICI बैंक का यह फैसला मौजूदा ग्राहकों के लिए बड़ी राहत है और नए ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद कर सकता है। बदलते बैंकिंग परिदृश्य में यह कदम बैंक को प्रतिस्पर्धा में मजबूती दे सकता है।